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वीर फत्ताजी(veer fattaji), बाबा झूंझारजी(Baba Jhunjharji), वीर बिग्गाजी(veer Biggaji), भूरिया बाबा (बाबा गौतमेश्वर)(Bhuriyawale baba) लोक देवताओ का इतिहास व महत्वपूर्ण प्रश्न

वीर फत्ताजी

  • जन्म – साथूं गाँव (जालोर)
  • गाँव पर लुटेरों के आक्रमण के समय इन्होंने भीषण युद्ध किया।
  • मेला -  प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल नवमी को मेला भरता है।

बाबा झूंझारजी

  • जन्म - इमलोहा गाँव, सीकर
  • मुख्य मंदिर – स्यालोदड़ा गाँव, सीकर 
  • मेला - रामनवमी 
  • वे गायों व महिलाओं की रक्षा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
  • बाबा झूंझारजी का स्थान सामान्यतः खेजड़ी के पेड़ के नीचे होता है। 

वीर बिग्गाजी

  • जन्म - रीडी गाँव (बीकानेर)
  • पिता - राव मोहन
  • माता - सुल्तानी देवी
  • बीकानेर के जाखड़ समाज के कुल देवता
  • मुस्लिम लुटेरों से गायों की रक्षा की
  • डूँगजी-जवाहरजी- 
  • प्रमुख मंदिर – बाठोठ–पाटोदा, सीकर 
  • सहयोगी – करणा मीणा व लोहट जाट
  • सीकर जिले के लुटेरे लोकदेवता, जो धनवानों व अंग्रेजों से धन लुटकर गरीबों में बाँट देते थे इसलिए उन्हें ‘गरीबों के देवता’ कहते हैं।
  • 1857 की क्रांति में सक्रिय भाग लिया एवं उन्होंने नसीराबाद छावनी लूट ली थी।
  • उन्होंने जोधपुर एवं बीकानेर की सेनाओं के विरुद्ध युद्ध लड़ा था।

भूरिया बाबा (बाबा गौतमेश्वर)

  • मीणा जाति के लोग भूरिया बाबा की झूठी कसम नहीं खाते।
  • इनका मंदिर गौड़वाड़ सिरोही के पर्वतों में स्थित हैं। 
  • इनके मंदिर सूकड़ी नदी के दाहिने किनारे पर गुर्जरों द्वारा बनवाया गया जिसे मीणा जाति के लोगों ने पूर्ण करवाया।
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