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हरिराम बाबा, पनराजजी, केसरिया कुंवरजी, भोमियाजी, मामादेव, खेतलाजी, आलमजी लोक देवताओं का इतिहास

हरिराम बाबा

  • प्रमुख मंदिर - झोरड़ा (नागौर)
  • गुरु - भूरा
  • मेला – प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल पंचमी
  • इन्हें सर्प रक्षक देवता कहते हैं।
  • इनके मंदिर में सर्प की बांबी की पूजा की जाती है।
  • इन्होंने साँप काटे हुए पीड़ित व्यक्ति को ठीक करने का मंत्र सीखा।

पनराजजी

  • जन्म - नगा गाँव (जैसलमेर)
  • मुस्लिम लुटेरों से काठौड़ी गाँव के ब्राह्मणों की गायें छुड़ाते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
  • इनकी स्मृति में पनराजसर गाँव (जैसलमेर) में वर्ष में दो बार मेला भरता है।

केसरिया कुंवरजी

  • लोकदेवता गोगाजी के पुत्र
  • इनके थान पर सफेद रंग की ध्वजा फहराते हैं।
  • इनके भोपे सर्पदंश से पीडित व्यक्ति का जहर मुँह से चूसकर बाहर निकाल देते हैं।

भोमियाजी

  • गाँव-गाँव में भूमि रक्षक देवता के रूप में प्रसिद्ध।

मामादेव

  • उपनाम - वर्षा के देवता तथा खारामामा
  • इनकी मिट्‌टी एवं पत्थर की मूर्ति नहीं होती है जबकि इनके प्रतीक के रूप में गाँव के बाहर लकड़ी का तोरण होता है।
  • इनको प्रसन्न करने के लिए ‘भैंसे की बलि’ दी जाती है अत: इन्हें ‘खारामामा’ भी कहते हैं।

खेतलाजी

  • प्रमुख मंदिर – सोनाणा गाँव, पाली
  • मेला – प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल एकम् 
  • यहाँ पर तोतले व हकलाने वाले बच्चों का इलाज किया जाता है। 

आलमजी

  • प्रमुख मंदिर – धोरीमन्ना, बाड़मेर
  • यहाँ पर घोड़ों की जात लगती है।
  • मालाणी, बाड़मेर में लूणी नदी के किनारे ढांगी नाम के रेतीले टीले पर उनका स्थान बना हुआ है जिसे आलम जी का धोरा भी कहते हैं।
  • यहाँ भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को मेला भी भरता है।
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