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4. इन्टरनेट का परिचय (Introduction to Internet) e-Book and Notes

4.1 इन्टरनेट (Internet ) क्या है ?

इंटरनेट (Internet) “सूचना का सुपरहाईवे' (Information highway) के नाम से भी प्रसिद्ध है। इसके जरिए आप नवीनतम (latest) वित्तीय समाचार (financial news) पा सकते हैं, लाइब्रेरी कैटलॉग (Library catalogue) को ब्राउज (browse) कर सकते हैं, अपने दोस्तों के साथ इनफार्मेशन (information) एक्सचेंज (exchange) कर सकते हैं या एक जीवंत (live) राजनीतिक बहस (political debate) में शामिल हो सकते हैं, इंटरनेट (Internet) एक ऐसा टूल (tool) है जो आपको टेलीफोन (telephone), फ़ैक्स (Fax) और पृथक (isolated) कंप्यूटरों से परे एक सूचना नेटवर्क तक ले जाता है ।

इंटरनेट (Internet) एक वैश्विक कंप्यूटर नेटवर्क (computer network) है जिसमें विभिन्न प्रकार की सूचना (information) और संचार (communication) सुविधाएं उपलब्ध हैं, जिसमें मानकीकृत संचार प्रोटोकॉल (standardized communication protocols) का उपयोग करते हुए इंटर-कनेक्टेड (interconnected) नेटवर्क शामिल हैं | आपस में जुड़े ही कंप्यूटर विभिन्न एजेंसियों से संबंधित होते हैं जैसे सरकार, विश्वविद्यालय, कंपनियां, व्यक्ति आदि | अधिकांश इंटरनेट (Internet) सेवाएं क्लाइंट / सर्वर (Client/Server) मॉडल पर काम करती हैं । एक कंप्यूटर अगर फाइल प्राप्त कर रहा है, तो एक क्लाइंट (client) कहलाता है, और अगर वह फाइल भेज रहा तो एक सर्वर (server) कहलाता है | इंटरनेट (Internet) तक पहुंच प्राप्त करने के लिए अधिकांश लोग अपने क्षेत्रों में एक इंटरनेट सेवा प्रदाता ( ISP-Internet Service Provider) के साथ एक खाता खोलते हैं ।

4.2 इन्टरनेट को एक्सेस कैसे करें? (How to Access Internet?)

एक बार जब आप अपने कंप्यूटर को सेटअप कर लिया तो हैं तो आप इंटरनेट (Internet) एक्सेस (Access) पाना चाहेंगे ताकि आप ई-मेल (Email) भेज सके, भेज सके, ई-मेल (E-mail) प्राप्त कर सके, वेब को ब्राउज कर सके, मूवी (movie) देख सके आदि इससे पहले कि आप इंटरनेट (Internet) एक्सेस कर सकें, आपको एक इंटरनेट कनेक्शन और एक वेब ब्राउज़र की आवश्यकता होगी । इंटरनेट (Internet) कनेक्शन पाने के लिए आपको एक इंटरनेट सेवा प्रदाता ( ISP ) और एक मोडेम (Modem ) की आवश्यकता होगी।

4.2.1 आईएसपी (ISP) ( इंटरनेट सेवा प्रदाता Internet Service Provider)

एक इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) एक ऐसा संगठन है जो इंटरनेट (Internet) का उपयोग और उपयोग करने के लिए सेवाएं प्रदान करता है । इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को विभिन्न रूपों में व्यवस्थित किया जा सकता है, जैसे वाणिज्यिक (commercial), समुदाय - स्वामित्व वाली (community owned), गैर-लाभकारी (non profit), या अन्यथा निजी स्वामित्व वाला (privately owned) 1

आमतौर पर ISP द्वारा प्रदान की जाने वाली इंटरनेट (Internet) सेवाओं में इंटरनेट एक्सेस, इंटरनेट ट्रांज़िट (Internet Transit), डोमेन नाम पंजीकरण (Domain Name System), वेब होस्टिंग (Web Hosting), यूजनेट सेवा (Usenet Service) और कोलोकेशन (Colocation) शामिल हैं।

4.2.2 मॉडेम (Modem)

मॉडेम एक डिवाइस या प्रोग्राम है जो डाटा संचारित ( Transmit) करने के लिए एक कंप्यूटर को सक्षम बनाता है, उदाहरण के तौर पर डाटा को टेलीफोन या केबल लाइन पर संचारित किया जा सकता है। कंप्यूटर में जानकारी डिजिटल (Digital) फॉर्म (Form) में संग्रहीत की जाती है जबकि टेलीफोन लाइनों पर इनफार्मेशन एनालॉग (Analog) फॉर्म (Form) में संचारित की जाती है। मॉडेम यही काम करता है – डिजिटल इनफार्मेशन को एनालॉग इनफार्मेशन में एवं एनालॉग इनफार्मेशन को डिजिटल इनफार्मेशन में परिवर्तित (change) करता है | मॉडेम (Modem), Modulator-Demodulator का संक्षिप्त रूप है |

एक मॉडेम एक कंप्यूटर या अन्य डिजिटल डिवाइस से आउटगोइंग (Outgoing) डिजिटल सिग्नल (Signal ) को एक कॉपर टूट्विस्टेड पेअर (Copper Twisted Pair) टेलिफोन लाइन के लिए एनालॉग सिग्नल (analog signal) में मोड्युलेट (modulate) करता है और आने वाले एनालॉग सिग्नल (Analog signal) को डिमोड्युलेट (demodulate) करता है और डिजिटल डिवाइस के लिए डिजिटल सिग्नल में इसे परिवर्तित करता है। मॉडेम विभिन्न प्रकार के होते हैं:

इंटरनल मोडेम (Internal Modem )

इंटरनल मॉडेम (Internal Modem) डेस्कटॉप या लैपटॉप कंप्यूटर में इनस्टॉल होता है जो नेटवर्क पर जुड़े कंप्यूटरों के साथ संवाद (Communicate) करने के लिए काम आता है। इंटरनल मॉडेम (Internal Modem) बाहरी मॉडेम (External Modem) से सस्ते होते हैं क्योकि इनको पॉवर आपूर्ति (Power Supply) व चेसिस (Chasis) की ज़रुरत नहीं होती है | आंतरिक मोडेम के दो प्रकार हैं: डायल-अप (Dial-Up) और वाई-फाई (Wi-Fi-Wireless Fidelity)। डायल-अप (Dial-Up) मॉडेम (Modem) एक टेलीफोन केबल पर काम करता है, उसे नेटवर्क से जुड़े टेलीफोन नंबर की आवश्यकता होती है और कनेक्शन स्थापित करने के लिये लॉग-इन विवरण (Login Credentials) चाहिए होता है | वाई-फाई (Wi-Fi) मॉडेम नेटवर्क से बिना किसी लॉग-इन विवरण (Login Credentials) के कनेक्ट हो जाते हैं

बाहरी (External) मोडेम

हो बाहरी (External) मोडेम (Modem), मॉडेम इनस्टॉल करने के लिए सबसे सरलतम मॉडेम का प्रकार है | टेलीफोन लाइन (Telephone line) मॉडेम के पीछे के पैनल (panel) पर एक सॉकेट (Socket) में प्लग (plug ) जाती है। बाहरी मोडेम अपनी स्वयं की बिजली आपूर्ति इस्तेमाल करता है जिससे आप जब भी इन्टरनेट कनेक्शन तोडना चाहे तो इसको बंद कर सकते हैं | इन मोडेम के उदाहरण DSL मोडेम ( Modem) हैं जो ब्रॉडबैंड (Broadband) कनेक्शन में इस्तेमाल होते हैं ।

पीसी कार्ड मोडेम (PC Card Modem )

ये मोडेम, पोर्टेबल (Portable) कंप्यूटर के लिए बनाया गया है, एक क्रेडिट कार्ड (Credit Card) के आकार के होते हैं और नोटबुक और हैण्ड हेल्ड (Hand Held) कंप्यूटर पर पीसी कार्ड स्लॉट (PC Card Slot) में फिट बैठते हैं । जब मॉडेम की जरूरतनहीं हो तब हम इसको हटा भी सकते हैं । उनके आकार को छोड़कर, PC कार्ड मोडेम बाहरी (external) और मोडेम के एक संयोजन (Combination) की तरह हैं। आंतरिक ( internal) इन उपकरणों को पोर्टेबल (Portable) कंप्यूटर में एक बाहरी स्लॉट (External Slot) में सीधे फिट कर दिया जाता है। इसमें टेलीफोन केबल के अलावा और किसी केबल की आवश्यकता नहीं होती है । ये कार्ड कंप्यूटर द्वारा संचालित होते हैं ।

टिप : आज स्मार्टफोन पीडीए (Smartphone), (PDA) और मोबाइल फोन का उपयोग डेटा मॉडेम (Data Modem) के रूपमें किया जा सकता है, जो कि एक पर्सनल कंप्यूटर से इन्टरनेट कनेक्ट करने के लिए वायरलेस एक्सेस प्वाइंट (Wireless Access Point) का निर्माण करता है।

त्वरित समीक्षा (Quick Review) 

  • मोडेम (Modem) का पूरा रूपक्या है? 
  • आईएसपी (ISP) क्या है ?

4.3 इंटरनेट कनेक्टिविटी के प्रकार (Types of Internet Connections) 

इंटरनेट ( Internet ) कनेक्टिविटी (Connectivity) ऐसी प्रक्रिया है जो व्यक्तियों और संगठनों (organizations) को कंप्यूटर, मोबाइल डिवाइस और कंप्यूटर नेटवर्क का उपयोग करके इंटरनेट (Internet ) से कनेक्ट करने में सक्षम बनाती है । इंटरनेट (Internet ) से कनेक्ट होने के बाद, उपयोगकर्ता इंटरनेट (Internet ) सेवाओं जैसे ईमेल (Email) और वर्ल्ड वाइड वेब (WWW-World Wide Web) एक्सेस कर सकते हैं ।

कुछ सामान्य प्रकार की इंटरनेट (Internet) कनेक्शन सेवाएं हैं:

4.3.1 डायल-अप (Dial Up): 

डायल-अप (Dial-up) आम तौर पर सबसे धीमी (slow) गति का इंटरनेट (Internet) कनेक्शन है और आजकल अप्रचलित है । एक फोन कॉल की तरह, एक डायल-अप (Dial-up) मॉडेम एक नंबर डायल करके इंटरनेट (Internet) से जुड़ जाता है, और जब आप वेब सर्फिंग (Web Surfing ) ख़त्म कर चुके होंगे तो यह डिसकनेक्ट (disconnect) हो जाएगा |

4.3.2 ब्रॉडबैंड (Broadband): 

यह हाई-स्पीड (High-speed) इंटरनेट (Internet) कनेक्शन आम तौर पर टेलीफोन कंपनियों द्वारा प्रदान किया जाता है जो आईएसपी (ISP) के रूपमें भी कार्य कर सकते हैं । उपलब्ध सबसे तेज़ विकल्पों में से एक ब्रॉडबैंड इंटरनेट (Broadband Internet) बड़ी मात्रा में सूचना भेजने के लिए कई डेटा चैनल (data channel) का उपयोग करता है। ब्रॉडबैंड (Broadband) शब्द ब्रॉड बैंडविड्थ (Broad Bandwidth) के लिए लघुकथन ( short form ) है | ब्रॉडबैंड इंटरनेट (Broadband Internet) स्पीड उपयोगकर्ताओं को कंप्यूटर के माध्यम से वीडियोकॉन्फरेंसिंग (video conferencing), कंप्यूटर पर वॉइस कॉल्स (voice calls) और उच्च गुणवत्ता वाले ऑडियो और वीडियो स्ट्रीमिंग (streaming) सहित प्रौद्योगिकियों (technologies) का लाभ लेने देता है । उपलब्ध ब्रॉडबैंड (Broadband) के प्रमुख प्रकार में डीएसएल (DSL), केबल और मोबाइल ब्रॉडबैंड (Mobile सैटेलाइट (Cable), (Satellite ) Broadband) शामिल हैं । ब्रॉडबैंड (Broadband) की गति को सामान्यतः मेगाबिट प्रति सेकंड (Mbps-Megabits per second) में मापा जाता है ।

4.3.3 वाईफाई: 

वाई-फाई (WiFi-Wireless Fidelity ) WLAN (Wireless Local Area networking) हेतु एक तकनीक है जिसे उपकरणों (devices) तक संचारित करने के लिए "रेडियो फ़्रीक्वेंसी (Radio Frequency)" आवश्यक होती है । Wi-Fi प्रौद्योगिकी (Technology) का उपयोग करने वाले डिवाइस में पर्सनल कंप्यूटर, वीडियो गेम कंसोल्स (Consoles), स्मार्टफोन, डिजिटल कैमरा, टैबलेट कंप्यूटर, डिजिटल ऑडियो प्लेयर और आधुनिक प्रिंटर शामिल हैं। WiFi कम्पेटिबल (compatible) डिवाइस एक WLAN नेटवर्क और एक वायरलेस एक्सेस प्वाइंट (access point) के माध्यम से इंटरनेट (Internet) से कनेक्ट कर सकते हैं । इस तरह के एक एक्सेस प्वाइंट (या Hotspot) की रेंज (range) घर के अंदर लगभग 20 मीटर (66 फीट) और घर के बाहर थोड़ी और ज्यादा होती है। हॉटस्पॉट का कवरेज (coverage) दीवारों युक्त एक कमरे के बराबर छोटा हो सकता है, जो रेडियो तरंगों (Radio Waves) को ब्लॉक करता है, या कई ओवरलैपिंग (overlapping) एक्सेस पॉइंट (access point) का उपयोग करके कई वर्ग किलोमीटर तक की कवरेज भी हो सकती है । कोई भौतिक (Physical) कनेक्शन नहीं होने पर, वायर्ड (Wired) कनेक्शन की तुलना में यह हमलों के प्रति अधिक सवेंदनशील (vulnerable) होता है, जैसे ईथरनेट (Ethernet) ।

चित्र 4.9 - वाई-फाई (Wi-Fi)

4.3.4 डीएसएल (DSL): 

डिजिटल सब्सक्राइबर लाइन (DSL - Digital Subscriber Line) सेवा एक ब्रॉडबैंड (broadband) कनेक्शन का प्रयोग करती है, जो इसे डायल-अप (Dial-up) से अधिक तेज बनाता है । DSL फोन लाइन के माध्यम से इंटरनेट (Internet ) से कनेक्ट करते हैं लेकिन इसके लिये आपको घर पर लैंडलाइन (Landline) होने की आवश्यकता नहीं होती है। डायल-अप (Dial-up) के विपरीत, यह एक बार सेटअप (Setup ) होने के बाद हमेशा कनेक्टेड (connected) रहता है और आप इसके साथ फ़ोन लाइन भी इस्तेमाल कर सकते हैं

4.3.5 केबल (Cable): 

केबल सेवा (Cable Service) केबल टीवी (Cable TV) के माध्यम से इंटरनेट (Internet) से कनेक्ट करती है यद्यपि इस सर्विस का लाभ लेने के लिए केबल टीवी (Cable TV) होने की जरूरत नहीं है। यह एक ब्रॉडबैंड (Broadband) कनेक्शन का उपयोग करता है और दोनों Dial-up और DSL सेवा की तुलना में तेज होता है; हालांकि, यह उन्ही स्थानों पर उपलब्ध हो सकता है जहाँ केबल टीवी (Cable TV) होता है।

4.3.6 उपग्रह (Satellite) : 

यह कनेक्शन ब्रॉडबैंड (Broadband) का उपयोग करता है. लेकिन केबल या फोन लाइनों की आवश्यकता नहीं है | यह पृथ्वी की परिक्रमा ( revolve) कर रहे उपग्रह के माध्यम से इंटरनेट (Internet) को जोड़ता है, परिणामस्वरूप यह लगभग दुनिया में कहीं भी इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन कनेक्शन मौसम की वजह से प्रभावित हो सकता है। एक उपग्रह कनेक्शन थोड़ी देरी से डेटा संचार करता है इसलिए उपग्रह कनेक्शन उन लोगो के लिये बहुत अच्छा विकल्प नहीं है जो रियल टाइम एप्लीकेशन (Real Time Application), जैसे गेमिंग (Gaming) या विडियो कॉन्फ्रेंसिंग का उपयोग करते हैं १

4.3.7 मोबाइल (Mobile) : 

मोबाइल फोन कनेक्शन के माध्यम से मोबाइल ऑपरेटर (operator ) द्वारा इंटरनेट (Internet ) सेवाएं प्रदान की जाती हैं | 3G और 4G सेवा का सबसे अधिक, मोबाइल फोन और टैबलेट । (Tablet) कंप्यूटर के साथ प्रयोग किया जा रहा है । यह आपके मोबाइल फ़ोन या टेबलेट ( Tablet) कंप्यूटर को ISP (इन्टरनेट सर्विस प्रोवाइडर ) के माध्यम से वायरलेस (wireless) तरीके से जोड़ता है यदि आपके पास एक उपकरण (Device) है जो 3G या 4G सक्षम है, तो आप इंटरनेट (Internet) घर से बाहर भी इस्तेमाल कर पायेंगे, तब भी जब वहाँ कोई WiFi कनेक्शन नहीं है ।

टिप : मोबाइल ब्रॉडबैंड एक पोर्टेबल मॉडेम (Portable Modem), मोबाइल फोन, USB वायरलेस मॉडेम (wireless modem), टैबलेट (Tablet) या अन्य मोबाइल उपकरणों के नेटवर्क के माध्यम से वायरलेस इंटरनेट (wireless internet) एक्सेस (access) के लिए प्रयोग में आने वाला एक विपणन (marketing) शब्द है।

त्वरित समीक्षा (Quick Review) 

  • एक ब्रॉडबैंड (Broadband) और डायल-अप (Dial-up) इन्टरनेट कनेक्शन में क्या अंतर है? 
  • किस इकाई (unit) में ब्रॉडबैंड (Broadband) इंटरनेट (Internet) की गति को मापा जाता है?

4.4 इंट्रानेट (Intranet)

एक इंट्रानेट (Intranet) एक निजी नेटवर्क है जो केवल उस संगठन (Organization) के कर्मचारियों के लिए ही सुलभ होता है। आम तौर पर संगठन के आंतरिक (Internal) आईटी सिस्टम (IT System) से जानकारी और सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला (Detailed List) संगठन के कर्मचारियों के लिये उपलब्ध होती है एवं ये इंटरनेट (Internet) पर आम जनता के लिए उपलब्ध नहीं होता है |

चित्र 4.11 - इंट्रानेट (Intranet )

एक इंट्रानेट (Intranet) वेबसाइट किसी भी अन्य वेब साइटों की तरह काम करती हैं, लेकिन एक इंट्रानेट (Intranet) को संरक्षण (Security) देने वाला फ़ायरवॉल (Firewall) अनाधिकृत (unauthorized) उपयोग को बंद कर देता है।

4.4.1 इंटरनेट बनाम इंट्रानेट (Internet v/s Intranet)

इन्टरनेट ग्लोबल (Global) वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) है जब कि इंट्रानेट (Intranet) एक कम्पनी का निजी (Private) इन्टरनेट है जिसे सिर्फ कंपनी के अन्दर इस्तेमाल किया जा सकता है। दोनों TCP/IP प्रोटोकॉल (Protocol) को उपयोग में लेते हैं साथ में ई-मेल (E-mail) और अन्य वर्ल्ड वाइड वेब (world wide web) मानक (standards) का इस्तेमाल भी करते हैं। दोनों में मुख्य फर्क यह है कि इंट्रानेट (Intranet) का यूजर इंटरनेट (Internet) पर जा सकता है लेकिन सुरक्षा कारणों जैसे कम्प्यूटर फ़ायरवॉल (Firewall) के कारण इन्टरनेट यूजर इंट्रानेट (Intranet) पर नहीं जा सकता है | इंट्रानेट (Intranet) बिना इंटरनेट (Internet) कनेक्शन के बिना भी चल सकता है।

https://i.stack.imgur.com/NOTOH.png

इंटरनेट (Internet), अधिक व्यापक एक बड़ी आबादी में फैला है, सभी वेब (Web) आधारित सेवाओं के लिए बेहतर पहुँच प्रदान करता है और इस प्रकार, बहुत से उपयोगकर्ता के अनुकूल (Suitable) है । इंट्रानेट (Intranet ) इंटरनेट (Internet) का एक अधिक सुरक्षित और निजीकृत (privatized) संस्करण (version) है । पूर्ण रूप से एक संगठन (Organization) में आंतरिक संचार (communication) के उद्देश्य से बनाया गया, इंट्रानेट (Intranet) एक ऐसी व्यवस्था है जो संगठन की संचार व्यवस्था को सुव्यवस्थित बनाए रखता है जिससे संपूर्ण वर्ष चौबीसों घंटे त्वरित (quick ) डेटा एक्सचेंज (data exchange) संभव हो पाता है।

त्वरित समीक्षा (Quick Review)

  • इन्टरनेट (Internet) और इंट्रानेट (Intranet) बीच अंतर क्या हैं?
  • इनमे से कौन अधिक सुरक्षित है – इन्टरनेट (Internet) या इंट्रानेट (Intranet)?

4.5 एक वेबसाइट खोलना (Opening a website)

एक वेबसाइट / वेबपेज खोलने से पहले, उन घटकों (systems) के पीछे की अवधारणा (processes) को समझना बहुत महत्वपूर्ण है जो इसे संभव बनाते हैं 

4.5.1 वर्ल्ड वाइड वेब (WWW - World Wide Web) 

वर्ल्ड वाइड वेब (www) एक ओपन सोर्स इनफार्मेशन स्पेस (Open Source Information Space) है जहां डाक्यूमेंट्स (documents) एवं बाकी वेब रिसोर्सेज (web resources) को उनके यूआरएल (URL) द्वारा पहचाना जाता है, ये डाक्यूमेंट्स (documents) एवं वेब रिसोर्सेज (web resources) हाइपरटेक्स्ट लिंक (Hypertext Link) द्वारा आपस में जुड़े होते हैं और इंटरनेट (Internet) के माध्यम से एक्सेस (access) किये जा सकते हैं | वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का इस्तेमाल कर अरबों लोग इन्टरनेट पर इंटरैक्ट (interact) करते हैं | एक विशिष्ट पेज को वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web ) पर वेब पेज (web-page) के नाम से जाना जाता है | इन वेब पेज (web pages) को एक स्पेशलाइज्ड सॉफ्टवेर (specialized software) का इस्तमाल करके, जो यूजर की मशीन (client's machine) पर रन (run) होता है, एक्सेस किया जाता है जिसको वेब ब्राउज़र (web browser) के नाम से जाना जाता है | वेब पेज टेक्स्ट (text), इमेज (images), वीडियो (videos), मल्टी मीडिया कंपोनेंट्स (multimedia components), वेब नेविगेशन फीचर (web navigation feature) जैसे हाइपरलिंक (hyperlinks ) आदि से मिल कर बने होते हैं ।

इंटरनेट (Internet) और वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) एक दूसरे के स्थान पर इस्तेमाल होते हैं लेकिन वे समान नहीं हैं। इंटरनेट (Internet ) हार्डवेयर भाग के रूप में कहा जा सकता है - यह या तो कॉपर वायर (Copper Wire), फाइबर ऑप्टिक केबल (Fibre Optic Cable) या वायरलेस कनेक्शन (Wireless Connection) के माध्यम से जुड़े कंप्यूटर नेटवर्क का एक संग्रह है, जबकि, वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) सॉफ्टवेयर (software) भाग के रूपमें कहा जा सकता है - यह वेब पेज का एक संग्रह है जो हाइपरलिंक (Hyperlink) और यूआरएल (URL) के माध्यम से जुड़े हुए हैं । वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) इंटरनेट (Internet) द्वारा उपलब्ध कराई गई सेवाओं में से एक है। ई-मेल (Email), चैट (Chat), ब्लॉगिंग (Blogging ) एवं फ़ाइल स्थानांतरण (File Transfer) इंटरनेट (Internet) पर सेवाओं के उदाहरण हैं।

4.5.2 वेबसाइट (Website)

एक वेब साइट वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) फाइलों का एक सम्बंधित संग्रह (related collection ) है जिसमे साथ में एक पेज भी होता है जिसे होम पेज (Home Page) कहते हैं | एक होम पेज वो पेज होता है जो कि किसी भी वेब साईट को एक्सेस करने पर सबसे पहले खुलता है । प्रायः कोई भी कम्पनी या एक व्यक्ति जिसकी वेबसाइट होती है वो आपको अपनी वेबसाइट के होम पेज का पता (Address) देता है क्यों कि होम पेज के द्वारा आप पूरी वेबसाइट को नेविगेट (Navigate) कर सकते हो और किसी भी पेज पर पहुँच सकते हो |

वेबसाइटों से कई कार्य किये जा सकते हैं और कई तरह से इन्हें काम लिया जा सकता है; वेबसाइट किसी की निजी (Private) वेबसाइट हो सकती है, एक वाणिज्यिक (Commercial) वेबसाइट हो सकती है, एक सरकारी (Govt.) वेबसाइट या एक गैर-लाभकारी संगठन (NGO) वेबसाइट भी हो सकती है। वेबसाइट एक व्यक्ति एक व्यापार या अन्य संगठन का कार्य हो सकता है, और आम तौर पर वेबसाइट एक विशेष विषय या उद्देश्य के लिए समर्पित होती है। किसी भी वेबसाइट पर किसी अन्य वेबसाइट के लिए एक हाइपरलिंक (Hyperlink) शामिल कर सकते हैं।

वेब पेज को अलग अलग आकार की कंप्यूटर आधारित एवं इन्टरनेट सक्षम (Internet-enabled) डिवाइस (device) के द्वारा देखा या एक्सेस किया जा सकता है जैसे डेस्कटॉप कंप्यूटर, लैपटॉप, पीडीए (PDA) एवं मोबाइल फ़ोन | एक वेबसाइट को एक कंप्यूटर सिस्टम पर होस्ट (host) किया जाता है जिसे वेब सर्वर (Web server) कहते हैं, इसे एचटीटीपी (HTTP) सर्वर भी कहा जाता है |

वेबसाइटों को दो व्यापक श्रेणियों ( categories) में विभाजित किया जा सकता है – स्टेटिक (Static) और डायनामिक (Dynamic) | स्टेटिक (Static) साइटों की जानकारी स्थिर होती है एवं यूजर को संवाद ( interaction) की अनुमति नहीं दी जाती है, जबकि डायनामिक (Dynamic) साईट वेब 2.0 समुदाय (group) का हिस्सा हैं, और साइट ओनर (Site owner ) और साइट आगंतुकों (followers) के बीच संवाद के लिए अनुमति देती हैं। 

4.5.3 यूनिफॉर्म रिसोर्स लोकेटर (URL - Uniform Resource Locator)

एक यूनिफ़ॉर्म रिसोर्स लोकेटर (URL) (जिसे आमतौर पर एक वेब पते (web address) के रूप में जाना जाता है); एक वेब संसाधन (web resource) का संदर्भ (reference) है जो एक कंप्यूटर नेटवर्क पर उस संसाधन का स्थान दर्शाता है और उस तक पहुचने के लिये इस्तेमाल किया जाता है | यूआरएल (URL) वेब पृष्ठों (HTTP) के संदर्भ (Reference) के लिए सबसे अधिक उपयोग किये जाते हैं, लेकिन यह फ़ाइल स्थानांतरण (File Transfer), ई-मेल (Mail to), या डेटाबेस एक्सेस (Database Access-JDBC), के लिए भी उपयोग किया जाता है। अधिकाँश ब्राउज़र (browser), वेब पेज (web-page) के यूआरएल (URL) को एड्रेस बार ( Address Bar ) में प्रदर्शित करते हैं 

चित्र 4.14 - युआरएल (URL)

यूआरएल (URL) एक वेबसाइट, फ़ाइल, या दस्तावेज़ का सामान्य प्रारूप में इंटरनेट पता (Internet address ) है: http://www.address/directories/filename

इंटरनेट (Internet) से जुड़े प्रत्येक कंप्यूटर का अपना अनूठा (unique) यूआरएल (URL) होता है जिसके बिना दुसरे कंप्यूटर उस तक नहीं पहुँच सकते हैं | आम तौर पर एक यूआरएल (URL) निम्न प्रकार से प्रदर्शित किया जा सकता है:

http://www.example.com/index.html

यह एक प्रोटोकॉल (HTTP), एक होस्ट नाम (Host name) / डोमेन नाम (Domain Name) (www.example.com), और एक फ़ाइल नाम (index.html) इंगित करता है । TLDs (टॉप लेवल डोमेन) के कुछ उदाहरण संदर्भ के लिए नीचे साझा कर रहे हैं.

क्षेत्र परिभाषा उपयोग हेतु
.COM व्यावसायिक (Commercial) व्यापार
.EDU शिक्षा विश्वविद्यालय
.GOV सरकार विभिन्न देशों की सरकार एवं भारत के विभिन्न राज्यों की सरकार
.NET नेटवर्क नेटवर्क प्रदाता (Network Providers )
.ORG संगठन (Organizations) गैर-लाभकारी और अन्य संगठन ( Non-profit & Miscellaneous organizations)

सारिणी (Table) 4.1 - टॉप लेवल डोमेन (Top Level Domain )

4.5.4 डोमेन नेम सिस्टम (DNS - Domain Name System)

डोमेन नाम सिस्टम इंटरनेट (DNS) डोमेन नामों (Domain ( Internet ) Name) का पता लगाने और उनका इन्टरनेट एड्रेस प्रोटोकॉल (Internet Address Protocol) में अनुवाद (translate) करने का एक तरीका है। एक डोमेन नाम एक इन्टरनेट एड्रेस को याद रखने का एक सार्थक और आसान तरीका है

डोमेन नेम सिस्टम (DNS) कंप्यूटर, सेवाओं, या किसी भी इंटरनेट (Internet) या एक निजी नेटवर्क से जुड़े संसाधन (resources) के लिए एक श्रेणीबद्ध (categorized) वितरित (distributed) नामकरण प्रणाली है। ये डोमेन नेम्स (Name), जो कि मनुष्य द्वारा आसानी ये याद किये जा सकते हैं को संख्यात्मक (numerical) आईपी (IP) पतों को परिवर्तित (change) करने का तरीका है, जिसकी आवश्यकता कंप्यूटर सेवाओं व डिवाइस (device) के लिये दुनिया भर में होती है

डोमेन नाम प्रणाली (Domain Name System) सभी इंटरनेट (Internet) सेवाओं की सुविधा का एक आवश्यक घटक (constituent) है क्योंकि यह इंटरनेट (Internet) की प्राइमरी डायरेक्टरी (Primary Directory ) सर्विस है। डोमेन नाम अल्फाबेटिक (alphabetic) होते है इसलिए याद करने में आसान हैं। इंटरनेट (Internet) हालांकि, वास्तव में IP एड्रेस पर आधारित है । हर बार जब आप एक डोमेन नाम (Domain name) का उपयोग करते हैं तब DNS सेवा इस डोमेन नाम (domain name) को एक विशिष्ट IP एड्रेस में बदल देती है । उदाहरण के लिए, डोमेन नाम www.example.com, IP एड्रेस 198.105.232.4 में परिवर्तित हो सकता है।

4.5.5 वेब ब्राउजर (Web Browser)

ब्राउज़र (Browser) एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है जो वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) पर कंटेंट को लोकेट (locate) करने, प्राप्त करने ( retrieve) एवं प्रदर्शित (display) करने में इस्तेमाल होती है, जैसे इमेज (Image), वेब पेज (Web page), विडियो कंटेंट्स (Video contents) आदि | एक क्लाइंट / सर्वर (Client/Server) मॉडल की तरह, ब्राउज़र एक क्लाइंट (client) की तरह काम करता है, जो यूजर के कंप्यूटर पर रन (run) होता है | ब्राउज़र वेब सर्वर (web server) को संपर्क करके इनफार्मेशन (information) रिक्वेस्ट (request) करता है। उसके बाद वेब सर्वर (web server) सूचना प्राप्त करके वापिस वेब ब्राउज़र को भेज देता है, ब्राउज़र इस इनफार्मेशन को प्रोसेस (process) करके कंप्यूटर पर डिस्प्ले (display) कर देता है |

आज के ब्राउज़र अतिआधुनिक (state of the art) है एवं पूरी तरह से कार्यात्मक (fully functional) सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन (application) है, जो वेब सर्वर (web server ) पर होस्टेड वेब पेज (hosted web pages), एप्लीकेशन (application), जावा स्क्रिप्ट (java script) एवं अन्य तरह के कंटेंट्स ( contents ) को प्रोसेस (process) और प्रदर्शित (display) कर सकते हैं | वेब ब्राउज़र एक यूजर इंटरफ़ेस (user interface), लेआउट इंजन (layput engine), रेंडरिंग इंजन (rendering engine), जावास्क्रिप्ट इंटरप्रेटर (javascript interpreter), यूजर इंटरफ़ेस बेक एंड (user interface back end), नेटवर्क एवं डाटा कंपोनेंट्स (network & data components) से मिल कर बनता है | ,

अधिकांश प्रमुख (popular) वेब ब्राउज़र के यूजर इंटरफ़ेस (User Interface) में कुछ अवयव (components) होते हैं जिनके नाम अलग अलग ब्राउज़र में अलग अलग हो सकते हैं। ये एलिमेंट्स (elements) हैं :

  • बैक व फॉरवर्ड बटन (Back & Forward Buttons) - क्रमश: वापस पिछले या अगले संसाधन (resources) में जाने के लिए |
  • एक रिफ्रेश (Refresh) या रीलोड (Reload) बटन (Button), मौजूदा संसाधन (Resource/Page) को फिर से लोड करने के लिए |
  • एक स्टॉप बटन (Stop Button) जो रिसोर्स लोडिंग ( Resoure Loading) रद्द करने के लिए होता है | कुछ ब्राउज़रों में, स्टॉप (Stop ) बटन को रीलोड (Reload) बटन के साथ विलय (combine) कर दिया जाता है |
  • एक होम बटन (Home button), यूजर (User) के मुख पृष्ठ (Home Page) पर लौटने के लिए |
  • एक एड्रेस बार (Address Bar) जो वांछित संसाधन (desired resource) या पेज का युनिफोर्म रिसोर्स आइडेंटिफायर (URIUniform Resource Identifier) दर्ज करने में काम आती है |
  • एक सर्च इंजन (Search Engine) में इनपुट शब्दों (Input keywords) के लिए एक सर्च बार (Search Bar); कुछ ब्राउज़रों में, सर्च बार (Search Bar) को एड्रेस बार ( Address bar) के साथ विलय के ( combine) कर दिया जाता है ।
  • एक स्टेटस बार (Status Bar) जो संसाधन (resource) या पेज को लोड (load) करने की प्रगति (progress) दर्शाती है, व साथ में जूमिंग (Zooming) बटन (buttons) भी होते हैं ।
  • व्यूपोर्ट (View Port) - ब्राउज़र विंडो (Browser Window) के भीतर वेबपेज (Web Page) का दृश्य क्षेत्र होता है । 
  • एक पेज के लिए HTML सोर्स (Source) को देखने की क्षमता ।
  • प्रमुख ब्राउज़र में एक वेब पेज के भीतर सर्च (search) करने के लिए इंक्रीमेंटल फाइंड फीचर (Incremental Find Feature) भी होता है |
  • अधिकतर ब्राउज़र HTTP सिक्योर (Secure) को सपोर्ट को सपोर्ट (support) करते हैं और वेब कैश (Web Cache), डाउनलोड हिस्ट्री (Download History), ब्राउज़िंग हिस्ट्री (browsing history) को नष्ट करने के लिए त्वरित (quick) और आसान तरीके प्रस्तुत करते हैं |

दो सबसे लोकप्रिय (popular) ब्राउज़र हैं- माइक्रोसॉफ्ट इंटरनेट एक्सप्लोरर (Microsoft Internet Explorer) / माइक्रोसॉफ्ट एज (Microsoft Edge) और गूगल क्रोम (Google Chrome) । अन्य प्रमुख ब्राउज़र में फ़ायरफ़ॉक्स (Firefox), एप्पल सफारी (Apple Safari) और ओपेरा (Opera) शामिल हैं।

नीचे क्रोम (Chrome) ब्राउज़र (Browser) का उपयोग कर एक वेबसाइट ' वेबपेज (webpage) खोलने का एक उदाहरण दिया गया है। दिखाए गए स्टेप के अनुसार, आपको एड्रेस बार ( Address Bar) पर जाकर अपनी वेबसाइट / वेबपेज का एड्रेस टाइप (Type) करना होगा (उदाहरण: http://www.google.co.in) | सीधे वेबसाइट पर जाने के लिए एंटर (Enter) दर्ज करें। आपको यह सुनिश्चित करने की ज़रूरत है कि आपका दर्ज (Type) किया गया एड्रेस सही हो | Enter को दबाने पर, आपकी निर्दिष्ट वेबसाइट / वेब पेज प्रदर्शित हो जाएगी। 

एचटीटीपी (HTTP) और एचटीटीपीएस (HTTPS):

एचटीटीपी (HTTP - Hyper Text Transfer Protocol) वितरित (distributed), सहयोगी (collaborative), हाइपरमीडिया (Hypermedia) सूचना (information) प्रणाली के लिए एक एप्लीकेशन प्रोटोकॉल (Application Protocol) है । HTTP वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) के लिये डेटा संचार (Data Transmission) का आधार है। हाइपर टेक्स्ट (Hyper Text) संरचित (self created) टेक्स्ट (text) होता है जो तार्किक (logical) लिंक (हाइपरलिंक) का उपयोग करता है | HTTP हाइपर टेक्स्ट का आदान-प्रदान ( Exchange) या हस्तांतरण (Transfer) करने का प्रोटोकॉल है | क्लाइंट-सर्वर (ClientServer) कंप्यूटिंग (computing) मॉडल में एक अनुरोध-प्रतिक्रिया (Request Response) प्रोटोकॉल के रूपमें (protocol) HTTP कार्य करता है। -

एचटीटीपी (HTTP) का उपयोग कर एक कंप्यूटर नेटवर्क पर सुरक्षित (Secure) संचार (communication) के लिए HTTPS (HTTP Secure) प्रोटोकॉल है । HTTP Secure का संचार HTTP पर होता है पर इसमें कनेक्शन ट्रांसपोर्ट लेयर (Connection Transport Layer) सिक्योरिटी (Security) या सिक्योर सॉकेट लेयर ( SSL Secure Layer) द्वारा एन्क्रिप्टेड (Encrypted) होता है | HTTP सिक्योर का मुख्या उद्देश्य (Objective) वेबसाइट का प्रमाणीकरण (authentication), गोपनीयता (secrecy) और डेटा के आदान-प्रदान की अखंडता (Integrity) है । यह विशेष एवं व्यापक रूप से उन इंटरनेट (Internet) वेबसाइटों के लिये उपयोग में लिया जाता है जहाँ पर पर वित्तीय लेन-देन (transaction) होता है या फिर डेटा को गोपनीय रखने (financial) की ज़रुरत होती है

टिप : मोबाइल ब्राउज़र (browser) एक ऐसा वेब ब्राउज़र है जिसे किसी मोबाइल डिवाइस जैसे मोबाइल फोन या पीडीए (PDA) पर उपयोग के लिए डिज़ाइन किया गया है। पोर्टेबल डिवाइस (Portable device) की छोटी स्क्रीन के लिए वेब सामग्री को सबसे प्रभावी ढंग से प्रदर्शित करने के लिए मोबाइल ब्राउज़र अनुकूल ( suitable) हैं । मोबाइल ब्राउज़र सॉफ्टवेयर को कम स्मृति क्षमता (low memory capacity) और वायरलेस हैंडहेल्ड डिवाइसों (Wireless handheld device) की कम बैंडविड्थ (bandwidth) को समायोजित (combine) करने के लिए छोटा और कुशल होना चाहिए।

त्वरित समीक्षा (Quick Review)

  • शिक्षा वेबसाइटों (Educational websites) के लिए किस तरह का टॉप लेवल डोमेन (Top level domain) उपयोग किया जाता है?
  • वेब ब्राउज़रों (Web browsers) के प्रमुख उदाहरण क्या हैं?

4.6 वेब सर्च करना (How to Search the Web) 

वेब सर्च (web search) करना सूचना प्राप्ति (information gathering) का एक तरीका है । इसका उद्देश्य उन सभी प्रासंगिक (relevant) दस्तावेजों की प्राप्ति है जो आपकी क्वेरी (Query) से सम्बन्धित हैं। किन्तु इसमें कुछ गैर प्रासंगिक (non relevant) दस्तावेज भी प्राप्त हो सकते हैं । वेब सर्च एक सर्च इंजन (Search Engine) के द्वारा ही संभव है ।

चित्र 4.18 - सर्च इंजन (Search Engine)

4.6.1 सर्च इंजन ( Search Engine)

एक वेब सर्च इंजन (Search Engine) वह साफ्टवेयर है जिसे वर्ल्ड वाईड वेब (WWW) गया है। सर्च रिजल्ट से सम्बन्धित सूचनाओं को खोजने के लिए बनाया (Search Result) को सामान्यतः परिणामों की एक सूची के रूप में प्रस्तुत किया जाता है जिसे “सर्च इंजन रिजल्ट पेज ” (SERP – Search Engine Result Page) कहा जाता है। सूचना वेब पेज (Web page), छवियों (Images), और अन्य कई तरह की फाइलों का मिश्रण हो सकती है । कुछ सर्च इंजन (Search Engine) डाटा बेस (Database) अथवा ओपन डायरेक्ट्रीज (Open Directories) से भी डाटा माईन (Data Mine) करते हैं ।

एक सर्च इंजन (Search Engine) वास्तविक समय (Real Time) निम्नलिखित प्रक्रियाओं (Processes) को संभालता है: 

  1. वेब क्रालिंग / वेब स्पाइडर (Web Crawling/Web Spider) 
  2. इंन्डेक्सिंग (Indexing)
  3. सर्चिंग (Searching)

एक वेब क्राउलर (Web Crawler) वह इंटरनेट (Internet) बोट (bot) है जो वेब अनुक्रमण (Web Indexing) के लिये वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) को व्यवस्थित (structured) तरीके से ब्राउज करता है । सर्ज इंजन वेब क्राउलिंग या स्पाइडर साफ्टवेयरों का उपयोग अपनी वेब कन्टेंट (Web Content) या दूसरी वेबसाइट के कन्टेंट (सामग्री) अनुक्रमण को अद्यतन (Update) बनाने के लिये करते हैं। वेब क्राउलर (Web Crawler) विजिट किये गए सभी पृष्ठों की प्रतिलिपि ( Copy) तैयार कर प्रस्तुत कर सकता है, जिसके डाउनलोड (download) किये गए पेजों को बाद में सर्च इंजन (Search Engine) द्वारा अनुक्रमित (index) किया जा सकता है जिसे उपयोगकर्ता और अधिक कुशलता से खोज सकता है।

इंन्डेक्सिग (अनुक्रमण) का अर्थ वेब पेज (web-page) पर पाए गये सम्बन्धित की वर्ड (related keywords) और परिभाषित हो सकने वाले टोकनो (Token) को उनके डोमेन नाम (Domain Name) और एचटीएमएल फील्ड (HTML Field) से जोड़ना है | इनका जोड़ (combination) सार्वजनिक डेटा बेस (Pubic Database) में किया जाता है जो वेब सर्च क्वेरी (Search Query) के लिये उपलब्ध रहता है। यूजर द्वारा एक शब्द के रूपमें भी क्वेरी (Query) की जा सकती है। इंडेक्स (Index) सम्बन्धित सूचनाओं को शीघ्र से शीघ्र खोजने में मदद करता है।

आम तौर पर जब कोई यूजर सर्च इंजन (Search Engine) में कोई क्वेरी (Query) दर्ज करता है तो वह कुछ शब्दों का समूह होता है । इन्डेक्स (Index ) में निहित तौर पर उन सभी वेबसाईट के नाम होते हैं जहाँ क्वेरी शब्दों के कीवर्ड (keyword) होते हैं एवं उन्हें तत्काल (advance) या क्षणिक (instant) तौर पर इंडेक्स (index) से प्राप्त किया जा सकता है वास्तविक प्रोसेसिंग लोड (processing load) इन वेबपेज (खोजे गए परिणामों – Web Pages) को सूचीबद्ध करने में लगता है |

सर्च इंजन (Search Engine) की उपयोगिता परिणामों की प्रासंगिकता ( relevancy) पर निर्भर करती है | उसी शब्द /शब्दाशों से सम्बन्धित से जानकारी लाखों वेबसाइटों पर उपलब्ध हो सकती है इसलिए उनमें से कुछ पेज दूसरों की तुलना में क्वेरी (Query ) से अधिक प्रासंगिक (relevant) एवं लोकप्रिय हो सकते हैं । अधिकतर सर्च इंजन (Search Engine) परिणामों की रैंकिंग (ranking) करके सबसे अच्छे परिणामों को सर्च रिजल्ट (search result) के रूपमें प्रस्तुत करते हैं ।

कौन सा पेज सबसे ज्यादा मैच (match) करता है या किस क्रम में परिणामों को दिखाया जाना है यह सुनिश्चित करने की प्रक्रिया हरेक सर्च इंजन (Search Engine) में अलग अलग होती हैं | शोध के अनुसार, आज सबसे ज्यादा लोकप्रिय सर्च इंजन (Search Engine) जिन्हें इंटरनेट (Internet) समुदायों द्वारा अत्यधिक काम में लिया जा रहा है वो निम्न हैं:

  1. गूगल (Google) 
  2. बिंग (Bing) 
  3. याहू (Yahoo)

गूगल सर्च (Google Search) जिसे सामान्यतः गूगल वेब सर्च (Google web search) या गूगल (Google) कहकर संबोधित किया जाता है, गूगल इनकारपोरेशन (Incorporation ) का एक वेब सर्च इंजन (Search Engine) है | यह वर्ल्ड वाइड वेब (World Wide Web) पर सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला सर्च इंजन (Search Engine) है, जिसमें हर रोज तीस करोड़ से अधिक सर्च किये जाते हैं | गूगल के सर्च - रिजल्ट (search result) पेज का आर्डर “पेज-रैंक ( Page Rank)” नामक पेटेंटेड प्रायोरिटी (Patented Priority) रैंक अलगोरिथम (Rank Algorithm) पर आधारित है

वेब सर्वर (web गूगल सर्च (Google Search) का मुख्य उद्धेश्य वेब सर्वर server) पर सार्वजनिक रूपसे उपलब्ध दस्तावेजों में शब्दों की खोज करना है ना कि डेटाबेस (database) में उपलब्ध चित्र (image) या डाटा (data) में खोजना ।

4.6.2 विकिपीडिया ( Wikipedia)

विकिपीडिया (Wikipedia) एक मुक्त (free) विश्वकोश (encyclopedia) है, जिसे उन लोगों द्वारा सहयोगात्मक (collaborative) रूपसे लिखा है जो इसका उपयोग करते हैं। यह एक विशेष प्रकार की वेबसाइट है जो सहभागिता (collaboration ) को आसान बनाने है के लिए डिज़ाइन की गयी है, जिसे विकी (Wiki) कहा जाता है। विकी (Wiki) एक सहभागी वेब साइट (Website) है जिसमें कई लेखकों के सतत सहभागी (collaborative) कार्य शामिल हैं । विकी (Wiki) वेबसाइट पर उपलब्ध पिछले लेखकों के द्वारा काम किये गए लेख को किसी के द्वारा भी संपादित (edit) करने, हटाने या संशोधित (modify) करने की अनुमति देता है ।

कई लोग प्रति घंटे हजारों परिवर्तन कर लगातार विकिपीडिया (Wikipedia) में सुधार कर रहे हैं। यह सभी परिवर्तन लेख के इतिहास और हाल में किये गए परिवर्तनों में रिकॉर्ड होते हैं ।

4.7 ई-मेल बनाना (How to create Email) 

इलेक्ट्रानिक मेल (Electronic Mail), जिसे आम तौर पर 1993 से ईमेल अथवा ई-मेल (E-Mail) कहा जाता हैं; एक मैसेज (message) को डिजिटल फॉर्म (digital form) में एक लेखक से दूसरे या एक से अधिक प्राप्तकर्ताओं (recipients) तक पहुंचाने का एक तरीका है । ई-मेल (Email) इंटरनेट (Internet) अथवा अन्य कंप्यूटर नेटवर्क द्वारा संचालित होता है। आज का ई-मेल (E-mail) सिस्टम “स्टोर व फॉरवर्ड" (Store and forward) मॉडल पर कार्य करता है | ई-मेल (E-mail) सर्वर इसे स्वीकार (accept) करते हैं, फॉरवर्ड (forward) करते हैं, पहुँचाते (deliver) हैं तथा उसको संग्रहित (store) भी रखते हैं । इसके लिये उपयोगकर्ता को और प्राप्तकर्ता (recipient) को एक ही समय पर आन लाईन होना अनिवार्य नहीं होता है। इसके लिये उपयोगकर्ता (sender) व प्राप्तकर्ता को उतने ही समय तक सर्वर से जुड़ा रहना होता है, जब तक कि सूचना सर्वर को भेजी जा सके या प्राप्तकर्ता सर्वर से सूचना प्राप्त कर ले। दोनो का साथ होना आवश्यक नहीं है ।

इंटरनेट (Internet) ई-मेल (E-mail) मैसेज के तीन भाग होते हैं: सन्देश एनवलप (Message envelope), सन्देश हैडर (Message Header) और मैसेज बॉडी (Message Body) । संदेश हैडर ( Message header) सूचना को नियंत्रित करता हैं जिसमें कम से कम ई-मेल (E-mail) के मूल प्रेषक का ई-मेल (E-mail) पता तथा प्राप्त करने वालों (recipients) के ई-मेल (E-mail) पते होते हैं। आमतौर पर इसमें वर्णनात्मक जानकारी भी जोड दी जाती है जैसे विषय (subject) का हैडर फील्ड (header field) तथा मैसेज (message) देने की तारीख व समय (date/time stamp)।

लोकप्रिय ई-मेल (E-mail) प्लेटफॉर्म में जी-मेल (G-Mail), हॉटमेल (Hotmail), याहू मेल (Yahoo Mail), आउटलूक (Outlook) एवं कई अन्य शामिल हैं । किसी ई-मेल (E-mail) पते का सामान्य प्रारूप localpart@domain है और इसका एक विशिष्ट उदाहरण jsmith@example.org है |

एक ई-मेल (E-mail) एड्रेस (Email Address ) में दो भाग होते हैं, @ सिम्बल (symbol ) से पहले का भाग (localpart) मेलबॉक्स का नाम होता  है | यह अक्सर यूजर/प्राप्तकर्ता का नाम होता है जैसे कि "jsmith" और @ सिम्बल (symbol ) के बाद का भाग डोमेन (domain) का नाम Mail box के प्रबंधन सम्बंधित इकाई का नाम होता है जैसे कि एक कंपनी का डोमेन नाम (उपरोक्त उदाहरण में example.com) |

4.7.1 ईमेल एक्सेस करना (How to Access Email) 

ई-मेल (E-mail) का उपयोग कैसे किया जाए इसका प्रदर्शन करने के लिए हम जी-मेल (Gmail) का उदाहरण लेंगे | ई-मेल (E-mail) लिखना तथा भेजना अन्य लोगो को जल्दी जानकारी देने का एक त्वरित (quick) तथा सरल तरीका है। एक टच (touch) बटन (button ) के माध्यम से ही आप अपने मित्रों या परिवार को कही से (विश्व में कही से भी) समाचार भेज सकते हैं ।

निम्नलिखित स्टेप आपको बताते हैं कि जी-मेल खाते (GMail Account) का इस्तेमाल करते हुए ई-मेल (E-mail) कैसे भेजना है। इसके लिए आपको निम्न की ज़रूरतहोगी:

  1. एक कंप्यूटर में कार्यकारी स्थिति में इंटरनेट (Internet) कनेक्शन | 
  2. एक सेट- उप किया हुआ ई-मेल खाता जिसमें ई-मेल (e-mail) भेजने व प्राप्त करने की सुविधा हो
  3. एक ई-मेल (e-mail) भेजने के लिये निम्न कदम दर कदम (step by step) दिशा-निर्देश का पालन करें

4.7.2 ईमेल भेजना (How to Send Email) 

स्टेप 1 : अपने जी मेल (GMail) में प्रवेश करें ताकि आप अपने जी मेल खाते के डैश बोर्ड (DashBoard) पर पहुंच जाये। 

स्टेप 2 :  कम्पोज (Compose) पर क्लिक करें 

स्टेप 3: एक नयी रिक्त ई-मेल (E-mail) विंडो (window) खुल जायेगी | टू (To) बॉक्स में उस ईमेल (email) पते को टाईप करें जिसे आप मेल भेजना चाहते हैं।

स्टेप 4: यदि आप किसी अन्य को भी शामिल करना चाहते हैं जिससे कि वे भी आपके संवाद (message) से अवगत (inform) रहें तो आप सीसी (CC) या बीसीसी (BCC) का उपयोग कर सकते हैं | सीसी (CC) का अर्थ (meaning) कार्बन कॉपी (carbon copy) तथा बीसीसी (BCC) का अर्थ ब्लाईड कार्बन कॉपी (Blind Carbon Copy) से है । सीसी (CC) क्षैत्र (field) में ई-मेल पते (Email address) को जोड़ने का अर्थ यह है कि इस सूचना की प्रति इस व्यक्ति/व्यक्तियों को भी प्राप्त होगी किन्तु इसे सभी देख पायेगे किन्तु यदि आपने इसे बीसीसी (BCC) में डाला है तो उक्त ईमेल की एक कॉपी जिसका पता इसमें आपने भरा है उसको भी प्राप्त होगी लेकिन दूसरे प्राप्तकर्ता (Receiver) उसका ई-मेल एड्रेस (Email Address) नहीं देख पायेंगे

स्टेप 5: विषय क्षेत्र (Subject प्राप्तकर्ता field) एक (Subject field) एक शीर्षक (Title) की तरह प्रदान करेगा | विषय क्षेत्र (recipient) को विषय के बारे में जानकारी पाने की सुविधा (Subject field) को खाली भी छोड़ा जा सकता है परन्तु उस दशा में आपको ई-मेल को देखने (Viewing) एवं छा (Sorting) में समस्या होगी ।

स्टेप 6: मेसेज क्षैत्र ( Message Field) में मैसेज (Message) टाईप करें इसमें वर्ड डाक्यूमेंट की तरह ही फार्मेट (Format) करने की व्यवस्था है जैसे फोन्ट शैली (Font Style), रंग (color) और आकार (size) | आप इसमें बुलेट बिन्दू (Bullet Points) भी जोड़ सकते हैं, ई-मेल के स्पेल्लिंग (spelling) की जाँच कर सकते हैं | आप दिखाये गये मेनू (Menu) से से स्वरूपण (Formatting) चुन सकते हैं ।

स्टेप 7: अपना मेसेज (message) ई-मेल (e-mail) की बॉडी (body) फील्ड (field) में डालें।

स्टेप 8: यदि आप अपनी लिखी ई-मेल (e-mail) से संतुष्ट हैं तो कंपोज़ (Compose) के नीचे स्थित नीले सेंड बटन (Send button) पर क्लिक करें। 

स्टेप 9: भेजा गया ईमेल (email) आपके जीमेल डैश बोर्ड (GMail Dash Board) पर “Sent” मेल फोल्डर (Mail Folder) में संग्रहित रहेगा । आप अपने माउस कर्सर (Mouse Cursor) से क्लिक कर इनबाक्स (Inbox) फोल्डर व अन्य फोल्डर को देख सकते हैं । 


स्टेप 10: आपकी ईमेल जाने के लिये तैयार हैं। लेकिन इसे सीधे भेजने के बजाय बाद में भी भेज सकते हैं। जीमेल (Gmail) अपने ड्राफ्ट (draft) को स्वतः ही सेव (Save) करता हैं इसलिये आप यदि मेल बंद भी कर देते हैं तो वापस आपकी अधूरी मेल ड्राफ्ट फोल्डर (Draft Folder) में सहेज ( Store) कर रखी हुई होती है जिसे आप पुन: ड्राफ्ट फोल्डर (Draft Folder) से लेकर पूर्ण कर सेंड (Send) बटन को क्लिक कर सामान्य तरीके से भेज सकते हैं |

4.7.3 विभिन्न ईमेल विकल्प (Various Email Options -CC/BCC/Attachments ) 

एक बार में कई प्राप्तकर्ताओं (recipients) को एक ईमेल (email) भेजने के लिए मुख्यतः तीन तरीके हैं - To, Cc और Bcc फ़ील्ड (Field) का उपयोग करना | इन फील्ड में से किसी में भी चाहे वह To: CC: या BCC: हो- आप एक से अधिक ईमेल (email address) दर्ज कर सकते हैं और अल्पविराम (Comma) से अलग कर सकते हैं ।

जैसा कि आप समझ सकते हैं. एक साथ कई प्राप्तकर्ताओं , (recipients ) को एक ईमेल (email) भेजना समय की वास्तविक बचत है । वास्तव में, व्यक्तिगत प्राप्तकर्ताओं ( individual recipients) को संदेश कॉपी पेस्ट करके ईमेल द्वारा कई लोगों को भेजा जाना, तब तक अनुशंसित (recommended) नहीं किया जाता है जब तक कि, निश्चित रूपसे, आप प्राप्तकर्ता (receiver) के नाम से प्रत्येक के नाम से प्रत्येक ई-मेल को निजीकृत (personalize) करना चाहते हैं

टू (To), सीसी (CC) और बीसीसी (BCC) कैसे काम करते हैं? 

सीसी (CC) और बीसीसी (BCC) दोनों आपके द्वारा सूचीबद्ध (listed) सभी ईमेल (email) को संदेश की एक प्रति अग्रेषित (send) करते हैं । CC (कार्बन कॉपी-Carbon Copy) और BCC (ब्लाइंड कार्बन कॉपी Blind Carbon Copy) के बीच मुख्य अंतर यह है कि,  BCC के साथ, प्राप्तकर्ताओं को एक दूसरे के बारे में पता नहीं चलता है।

जीमेल (Gmail) में सीसी (CC) फ़ील्ड (field) का उपयोग तब करें, जब आप यह चाहते हैं कि प्राप्तकर्ता को एक-दूसरे के बारे में पता चले । "विशेष और गोपनीय" (special/secretive) ईमेल (email) संदेशों के लिए बीसीसी (BCC) का प्रयोग होता है।

बीसीसी (BCC) फील्ड (field) के उपयोग के लिए सलाह: To: फ़ील्ड में आपका एक वैकल्पिक (alternate) ईमेल पता (email address) दर्ज करें ( क्योंकि आप इसे खाली नहीं छोड़ सकते हैं) और बाकी सभी को बीसीसी (BCC) में डालें ।

अपने जीमेल संदेश के साथ अटैचमेंट्स भेजें (Send attachments with your your GMail message)

आप आपके ई-मेल (email) में अटैचमेंट्स (attachment), जैसे कि फ़ाइलें (file), वीडियो और फ़ोटो जोड़ सकते हैं। यदि आप बड़ी फ़ाइलों को जोड़ना चाहते हैं जो अटैचमेंट्स आकार (attachment size) से अधिक हैं, जैसे वीडियो (video), तब आप गूगल ड्राइव (Google Drive) का उपयोग कर सकते हैं ।

एक फ़ाइल संलग्न (Attach) करने के लिए कदम (steps): 

  1. जीमेल (Gmail) खोलें। 
  2. “कंपोज़ (Compose)” पर क्लिक (Click) करें । 
  3. “अटैच” (Attach) पर क्लिक करें 
  4. उन फ़ाइलों को चुनें, जिन्हें आप अपलोड (Upload) करना चाहते हैं । 
  5. “ओपन” (Open) पर क्लिक करें

युक्ति (Tip): आप एक छवि (Image) को कम्पोज विंडो (Compose window) में ड्रैग (drag) करके छोड़ दें तो भी अटैचमेंट (Attachment) में वह जुड़ जायेगा। 

अटैचमेंट हटायें (Remove Attachments)

अटैचमेंट (Attachment) जोड़ने के बाद, आप इसे हटा भी सकते हैं । अटैचमेंट (Attachment) नाम के दाई (right) ओर, “बंद करें” (Close) पर क्लिक करें ।

अटैचमेंट आकार की सीमा (Attachment Size Limit) 

आप अटैचमेंट (Attachment) में 25 एमबी (25MB) तक भेज सकते हैं। यदि आपके पास एक से अधिक अटैचमेंट (Attachment) है, तो वे सब जोड़कर 25MB से ज्यादा नहीं होना चाहिए। यदि आपकी फ़ाइल 25 एमबी से अधिक है, तो जीमेल (Gmail) स्वतः ही इसे एक अटैचमेंट के रूपमें शामिल करने के बजाय ईमेल (email) (Attachment) में एक गूगल ड्राइव लिंक (Google Drive link) जोड़ता है । जिस व्यक्ति को आप फ़ाइल भेजते हैं, वह इसे डाउनलोड ( download) कर सकता है, इसलिए उसके पास इसका एक्सेस (access) होगा, भले ही आप उसे गूगल ड्राइव (Google drive) से हटा दें ।

बल्क ईमेल (Bulk email) एक प्रकार का ईमेल संदेश है, जो वर्गीकृत (classify) करना इतना आसान नहीं होता है जबकि जंक ईमेल (Junk email) का खतरा हमेशा बना रहता है, बल्क ईमेल (Bulk email) में आमतौर पर एक विज्ञापन (advertisement) या मार्केटिंग संदेश (marketing message) शामिल होता है जिसे बार-बार भेजे जाने की संभावना नहीं होती है । बल्क ईमेल (Bulk email) कुछ उपयोगकर्ताओं द्वारा वांछित होता है और वास्तव में कुछ ऐसे उपयोगकर्ता होते हैं जो इन संदेशों के लिए जानबूझकर साइन अप (Sign Up) करते हैं, जबकि अन्य उपयोगकर्ता इन प्रकार के संदेशों को स्पैम (Spam) समझते हैं ।

त्वरित समीक्षा (Quick Review)

  • जब आप ईमेल लिखते हैं उसमे सीसी (CC) और बीसीसी (BCC) क्षेत्रों (field) में अंतर क्या है?
  • जीमेल (Gmail) में ट्रैश फ़ोल्डर ( Trash folder) का उद्देश्य क्या है?

4.8 उपयोगी वेबसाइट्स (राजस्थान में ) - Useful Websites in Rajasthan

राजस्थान सरकार और इसके विभागों के लिए विशेष रूपसे उपलब्ध कई उपयोगी और सूचनात्मक (informative) वेबसाइट हैं। उनमें से कुछ नीचे दिए गए अनुभागों में समझाए गए हैं ।

4.8.1 राज्य पोर्टल, राजस्थान सरकार (State Portal, Govt of Rajasthan )

https://www.rajasthan.gov.in राज्य सरकार की मुख्य वेबसाइट है, जिसमें प्रमुख विभागों (principal departments) और संबंधित अनुभागों ( sections) के लिंक हैं ।

राज्य पोर्टल (State Portal) आम आदमी के लिए सूचनात्मक (informative) और ट्रांजेक्शन (transaction) सम्बन्धी सरकारी सेवाओं (Government Services) तक आसान और सुविधाजनक पहुंच प्रदान करना है । इसके साथ, राजस्थान सरकार इसके माध्यम से किसी भी समय और कहीं भी सभी नागरिक सेवाओं तक पहुंचने के लिए एकल खिड़की (One Stop Window) इंटरफ़ेस (Interface ) प्रदान करती है ।

राज्य पोर्टल (State Portal) के लाभ:

नागरिकों और सरकारी उपयोगकर्ताओं (Government (Citizen) और Users) के लिए सभी सरकारी मामलों के लिए सूचना का एक स्रोत (source) | इस पोर्टल पर एक वेब निर्देशिका (guidelines) (https://rajasthan.gov.in/Government/WebDirectory/Pages/default.aspx) भी है जिसका इस्तेमाल उपयोगकर्ताओं द्वारा राज्य सरकार के किसी भी विभाग (department), एजेंसी (agency), स्वायत्त निकाय (Autonomous Body), राज्य विधानसभा (state assembly), न्यायपालिका (judiciary) आदि की वेबसाइट तक पहुंचने के किया जा सकता है।

नागरिकों (Citizens), व्यवसायों ( Businesses ) और विदेशी लोगों के लिए सभी सूचनात्मक ( Informatory) / लेन-देन ( transaction) सम्बन्धी सरकारी सेवाओं के लिए सिंगल विंडो इंटरफ़ेस (Single Window Interface) |

विभागीय वेब पोर्टल्स (web portals) से तुरंत लिंक करने के लिए। यह विभागीय वेबसाइटों के माध्यम से वास्तविक समय के अपडेट (real time update) उपयोगकर्ताओं तक पहुँचाना सुनिश्चित करता है ।

4.8.2 आवेदन भरने के लिए आरपीएससी वेबसाइट (RPSC Website for Application filling)

मुख्य वेबसाइट लिंक - https://rpsc.rajasthan.gov.in/ आवेदन भरने हेतु लिंक https://rpsc.rajasthan.gov.in/applyonline/

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