कम्प्यूटर का संगठन (Computer Organisation)

कम्प्यूटर का संगठन  (Computer Organisation)

पर्सनल कम्प्यूटर एक माइक्रो कम्प्यूटर है और कम्प्यूटर के विकास के साथ उसके गुणों के कारण उसकी उपयोगिता प्रतिदिन बढ़ती जा रही है।

पर्सनल कम्प्यूटर की विशेषताएँ-

  1. पर्सनल कम्प्यूटर को अर्द्धचालक तकनीको (Semi-conductor Technology)
  2. इन माइक्रो कम्प्यूटर का आकार दिन पर दिन छोटा होता जा रहा है।
  3. दिन-पर-दिन इनकी कार्य करने की गति बढ़ती जा रही है।
  4. समय के साथ इनकी कीमत कम होती जा रही है।
  5. इनमें माइक्रोप्रोसेसर का उपयोग किया जाता है।

कम्प्यूटर बाइनरी संख्या 0 तथा 1 में कार्य करते हैं। प्रत्येक कम्प्यूटर, निर्देशों को बाइनरी संख्या में ग्रहण करते हैं और उसके बाद यह अपने अन्य प्रभागों के साथ कार्य करता है। यह काम भी बाइनरी संख्या के रूप में ही होता है। बाइनरी संख्या को विद्युत विभव के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। साधारणतया 0 विद्युत विभव के निम्न स्तर को तथा 1 विद्युत विभव के उच्च स्तर को प्रदर्शित करता है।

कम्प्यूटर हार्डवेयर (Computer Hardware)

कम्प्यूटर के भौतिक उपकरण उसके हार्डवेयर कहलाते हैं। एक डिजिटल कम्प्यूटर के मुख्य तीन प्रकार के भाग होते हैं-

हाडवेयर उपकरण -

    • इलेक्ट्रानिक उपकरण (Electronic devices)
    • चुम्बकीय उपकाप (Magnetic devices)
    • यांत्रिक उपकरण (Mechanical devices)

इनपुट व आउटपुट उपकरण कम्प्यूटर के मुख्य हार्डवेयर है। हम पर्सनल कम्प्यूटर के हार्डवेयर को सम्मिलित रूप से प्रदर्शित कर सकते हैं-

  1. इनपुट उपकरण (Input Devices) - माउस, की-बोर्ड, जायस्टिक, लाइटपैन आदि।
  2. सिस्टम इकाई के भीतरी उपकरण (Inside the System Unit) - मदर बोर्ड (Mother Board), माइक्रोप्रोसेसर (Microprocessor), गणितीय मदद के लिये प्रोसेसर, (Math-co-processor), RAM chips, हार्ड डिस्क (Hard disk), ROM chips, विडियोकार्ड, प्रिंटर कार्ड आदि।
  3. आउटपुट उपकरण (Output Devices) - मॉनीटर (monitor), प्रिंटर, स्पीकर (speaker)
  4. संग्रहण उपकरण (Storage Devices) - फ्लॉपी डिस्क ड्राइव, सीडी रोम (CD ROM), मेग्नेटिक टेप, जिप ट्राइव आदि।
  5. पावर सप्लाई (Power Supply) - CVT(Constant Voltage Transformer), UPS (Uninterrupted Power Supply)|
  6. प्रोसेसिंग इकाई (Processing Unit) - कम्प्यूटर का वह भाग जहाँ पर डाटा पर कार्य किया जाता है प्रोसेसिंग इकाई कहलाती है। इसके मुख्य भाग निम्न हैं-

केन्द्रीय प्रोसेसिंग इकाई (CentralProcessing Unit-CPU)

यह कम्प्यूटर का मुख्य भाग है। हम कह सकते हैं कि कम्प्यूटर का दिल है। इसके मुख्य भाग निम्न हैं-

  1. अंकगणित लॉजिक इकाई (Arithmetic Logic Unit-ALU)
  2. नियंत्रण इकाई (Control Unit-CU)

एक माइक्रोप्रोसेसर उपयोग में बहुत कुछ CPU के समान होता है। माइक्रोप्रोसेसर में सभी लॉजिक परिपथ एक ही चिप पर उपर होते हैं। माइक्रोप्रोसेसर में ALU, नियंत्रण इकाई व रजिस्टर (मेमोरी भाग) एक साथ एक ही चिप पर होते हैं। चिप (Integrated circuit) कहलाती है। वर्तमान में इन्टैल पेन्टियम II (P-II) व इन्ट्रल पैन्टियम III (P-III) माइक्रोप्रोसेसर काम आता है।


1. अंक गणितीय लोगिक इकाई (Arithmetic Logical Unit (ALU):-

सभी गणनायें ALU में की जाती है ALU मूलतः दो प्रकार के कार्य करता है-

  • अंकगणित कार्य जैसे जोड़ना, पटाना आदि।
  • लॉजिक कार्य जैसे AND OR. EXOR, NOT आदि ।

ALU नियंत्रण इकाई की निगरानी में कार्य करता है। इसके द्वारा मेमोरी से डाटा ग्रहण किया जाता है। उसके बाद उन डाटा पर गणनाएँ की जाती हैं।

तुलना करने के लिए लॉजिक कार्य जैसे AND, OR, NOT आदि का उपयोग किया जाता है। तुलना के परिणाम हां, अथवा नहीं में होते हैं जिनमें निर्णय लेने में सहायता मिलती है। ALU में डाटा का कार्य होने के बाद परिणाम को या तो प्रदर्शन के लिये आउटपुट उपकरणों में भेज दिया जाता है या उन्हें मेमोरी में संग्रहित कर लिया जाता है।

2. नियन्त्रण इकाई (Control Unit):-

यह इकाई मानव शरीर के तंत्रिका तंत्र के समान है। यह इकाई कम्प्यूटर के प्रत्येक भाग में नियन्त्रण संकेतों को प्रसारित करती है। नियन्त्रण इकाई दो प्रकार के संकेत प्रदान करती है-

  • (अ) नियन्त्रण संकेत (Control Signals) 
  • (ब) समय संकेत (Timing Signals)

यह इकाई माइक्रोप्रोसेसर व अन्य भागों (मेमोरी आदि) के मध्य डाटा के प्रवाह पर नियन्त्रण रखती है। यह इकाई सर्वप्रथम दिये गये निर्देषों को पढ़ती है तथा उन्हें समझाती है अर्थात् जैसे क्या करना है? व क्या संग्रह करना है? प्रत्येक निर्देश को समझने के बाद यह कम्प्यूटर के सम्भावित भागों को संकेत भेजती है।

प्रोसेसर एवं प्रोसेसर की चाल

- प्रोसेसर की कार्य-प्रणाली को 'बिट' के आधार पर आंका जाता है, जैसे की 8-बिट, 16-बिट, 32-बिट एवं 64-बिट। हर एक बिट में दो मान होते हैं (00 या 01 या 10 या 11 ) इस प्रकार 32-बिट में कुल 232 तक मान होते हैं। 32-बिट प्रोसेसर एक समय में कुल 232 तक के आंकड़ों पर कार्य करने में सक्षम होते हैं। एक प्रोसेसर में जितने अधिक बिट होंगे उनके कार्य करने की क्षमता एवं सटीकता उतनी ही प्रभावशाली होगी। 

32-बिट प्रोसेसर 32-बिट एवं उससे कम क्षमता तक के ऑपरेटिंग सिस्टम एवं एप्लिकेशन पर ही कार्य कर सकता है। 32-बिट प्रोसेसर 64-बिट क्षमता के ऑपरेटिंग सिस्टम एवं एप्लिकेशन पर कार्य नहीं कर सकता। जबकि 64-बिट प्रोसेसर 32 -बिट एवं उससे कम क्षमता तक के ऑपरेटिंग सिस्टम एवं एप्लिकेशन पर कार्य कर सकता है। कुछ माइक्रोप्रोसेसर या सीपीयू चिप- पेंटियम, पेंटियम-III, पेंटियम-IV, पेंटियम कोर 2 डुयो (Pentium core 2 Duo), सेलेरॉन, एएमडी एथलॉन (AMD Athlon), साइरिक्स (Cerise), एएमडी ड्यूरान (AMD-Duran) etc.

प्रोसेसर गति (Processor Speed)- 

  • CU तथा ALU अविश्वसनीय गति से कार्य करते हैं। ये कार्य प्रायः अंत: निर्मित - इलेक्ट्रॉनिक घड़ी (सिस्टम क्लॉक के नाम से जानी जाती है। 
  • जो प्रति सेकेण्ड करोड़ों नियमित विद्युत किरणें छोड़ती है  (इसे क्लॉक साइकल कहते हैं) द्वारा समान गति से होते हैं। 
  • निर्देश क्लोक साइकल्स की विशिष्ट संख्या में विधिवत समयान्तराल में फेच (Fetched), डिकोड तथा निष्पादित किये जाते हैं। 
  • एक चक्र यह समय होता है जिसमें एक कार्य सम्पन्न होता है जैसे कि एक मेमोरी लोकेशन से दूसरी मेमोरी लोकेशन डेटा की एक बाइट का जाना। सामान्यतः एक प्रोग्राम निर्देश को निष्पादित (Execute) करने, फेच करने व डिकोड करने के लिए अनेक क्लॉक साइकल्स की आवश्यकता पड़ती है। 
  • जितनी छोटी क्लॉक साइकल होगी उतना तेज प्रोसेसर होता है। अत: जिस गति पर एक निर्देश निष्पादित होता है, वह कम्प्यूटर की अन्त: निर्मित क्लॉक स्पीड, जो प्रति सेकेण्ड पल्सेस उत्पन्न करती है ये सीधी संबद्ध होती है। 
  • इस क्लॉक स्पीड को मेगाह या गीगाहर्ट्स में मापा जाता है जहाँ मेगा का अभिप्राय 10° और गीगा का अर्थ 10 और हज़ का अभिप्राय साइकल्स प्रति सेकेण्ड होता है। 
  • सालों साल प्रोसेसर्स की क्लॉक स्पीड बढ़ती ही गई है। 
  • आज के अधिकांश लोकप्रिय पर्सनल कम्प्यूटर्स की क्लॉक स्पीड 500 Mhz (0.5 GHz) से लेकर 4000 MHz (4.0 GHz) तक है। हालांकि प्रोसेसर की गति तेज करने के प्रयास निरन्तर जारी हैं। 
  • अन्य मापदण्ड समान होने से 500 Mhz की दर पर कार्य कर रहा CPU 100 Mhz पर संचालित CPU से 5 गुणा अधिक तेजी से डेटा प्रोसेस कर सकता है।


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