शुक्रवार, 15 अक्तूबर 2021

कम्प्यूटर स्मृति (Computer Memory)

कम्प्यूटर स्मृति (Computer Memory)

कम्प्यूटर स्मृति या मेमोरी का कार्य किसी भी निर्देश, सूचना अथवा परिणाम को संचित करके रखना होता है। कम्प्यूटर के सी.पी.यू. में होने वाली समस्त क्रियायें सर्वप्रथम स्मृति में जाती हैं। यह एक प्रकार से कम्प्यूटर की संग्रहशाला होती है। पड़ने पर तत्काल उपलब्ध होते हैं।  मेमोरी कम्प्यूटर का अत्यधिक महत्वपूर्ण भाग है जहां डाटा, सूचना और प्रोग्राम प्रक्रिया के दौरान स्थित रहते हैं और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल उपलब्ध होते है.

बेसिक आधार पर ये दो प्रकार की होती हैं:-

  • I. प्राथमिक या मुख्य मेमोरी
  • II. द्वितीयक या सहायक मेमोरी

I. प्राथमिक या मुख्य मेमोरी

  • मुख्य स्मृति या मेन मेमोरी कम्प्यूटर के हृदय यानि माइक्रोप्रोसेसर या मदरबोर्ड के अंदर लगी रहती है। 
  • इसे प्राथमिक भंडारण इकाई या प्राइमरी स्टोरेज यूनिट भी कहते हैं। 
  • यह मुख्यत: इलेक्ट्रॉनिक या सेमीकण्डक्टर मेमोरी होती है जो सी.पी.यू. से जुड़ी रहती है। 
  • इसे अनेक छोटे भागों में बाँटा जाता है जिन्हें लोकेशन या सेल कहते हैं और प्रत्येक सेल (Cell) में एक निश्चित बिट (Bit) होता है जिसे वर्ड लेंथ (Word length) कहते हैं। 
  • यह लेन्थ 8, 16, 32 या 64 बिट की हो सकती है। 

एक्सेस के आधार पर इसके निम्न प्रकार हैं-

(i) रोम (ROM- Read Only Memory)- 

  • यह एक स्थायी मेमोरी है 
  • इसमें संग्रहित डाटा व सूचनायें न तो नष्ट होती हैं और ना ही उनमें कोई परिवर्तन होता है। 
  • रोम में संग्रहित सूचना को केवल पढ़ा जा सकता है । 
  • वास्तव में ROM में सूचनायें निर्माण के समय ही भण्डारित कर दी जाती हैं । 
  • कम्प्यूटर के बंद होने पर भी रोम में सूचनाएं संग्रहित रहती हैं, नष्ट नहीं होती। 
  • रॉम में डाटा डालने को Burm (Burning of the Data) कहते हैं।

(ii) प्रोग्रामेबल रोड ओनली मेमोरी (PROM-Programmable Read Only Memory)- 

  • एक विशेषीकृत रॉम जिसमें उपयोग करने वाले के अनुकूल डाटा को प्रोग्रामिंग की जाती है।

(iii) ई-प्रॉम (E-PROM-Erasable Programmable Read Only Memory)- 

  • इस रॉम से डाटा या प्रोग्राम को हटाकर उस पर नया प्रोग्राम लिखा जा सकता है। 
  • इस रॉम पर से प्रोग्राम को हटाने (Earase) के लिए पराबैंगनी किरणों (Ultra-voilet Rays) का प्रयोग किया जाता है। 
  • इसी कारण इसे UV PROM भी कहा जाता है।

(iv) ई-ई प्रॉम (EEPROM-Electrically Erasable Programmable Read Only Memory)- 

  • इस रॉम से पुराने प्रोग्राम को हटाकर नये प्रोग्राम को लिखा जा सकता है। 
  • ई-प्रॉम से प्रोग्राम को हटाने के लिए जहाँ उसे सर्किट से निकालना पड़ता है वहीं ई-ई प्रॉम से प्रोग्राम हटाने के लिए उसे सर्किट से निकालने की आवश्यकता नहीं पड़ती है। 
  • इसे फ्लैश मेमोरी भी कहा जाता है।

(v) रैम (RAM-Random Access Memory)- 

  • यह एक कार्यकारी/अस्थायी मेमोरी होती है। 
  • यह तभी काम करती है जब कम्प्यूटर कार्यशील रहता है। कम्प्यूटर को बन्द करने पर रैम में संग्रहित सभी सूचनाएं नष्ट हो जाती हैं। 
  • कम्प्यूटर के चालू रहने पर प्रोसेसर रैम में संग्रहित आंकड़ों और सूचनाओं के आधार पर काम करता है। इस स्मृति पर संग्रहित सूचनाओं को प्रोसेसर पढ़ भी सकता है। 
  • इसमें रखे डाय व सूचनाओं में परिवर्तन भी किया जा सकता है। रैम को कम्प्यूटर के मदर बोर्ड पर बने सिम्स (SIMMs- Single Inline Memory Modules) में लगाया जाता है। 
  • ये कम्प्यूटर के प्राथमिक संग्रहण उपकरण होते हैं। 
  • इनका CPU के साथ सीधा संपर्क होता है, उपयोगकर्ता द्वारा भरी गई जानकारी तथा निर्देश ऑपरेटिंग सिस्टम से सर्वप्रथम RAM में आती है, फिर किसी भी जानकारी को CPU जरुरतानुसार RAM से लेता है तथा क्रियान्वयन के पश्चात् उसे पुन: RAM के पास भेज देता है, जहाँ से उसे ऑपरेटिंग सिस्टम ग्रहण कर लेता है। 
  • इनकी क्षमता किलो बाइट, मेगाबाइट तथा गीगाबाइट आदि में नापी जाती है।

(vi) कैश मेमोरी (Cache Memory)- 

  • यह मुख्य मेमोरी और सी.पी.यू. के बीच की एक तीव्र मेमोरी है जिसमें बार-बार प्रयुक्त होने वाले डाटा और निर्देश संग्रहितं रहते हैं। 
  • यह मेमोरी और सी.पी.यू. के बीच गति अवरोध को दूर करती है।

II. द्वितीयक या सहायक मेमोरी

यह डाटा एवं सूचनाओं की एक बड़ी मात्रा के संग्रहण के लिए इस्तेमाल होता है। इसे सेकेण्डरी स्टोरेज यूनिट, गौण स्मृति, ऑक्जिलरी स्टोरेज यूनिट भी कहते हैं। यह मेमोरी सामान्यत: जिन डिवाइसों में होती है वे कम्प्यूटर के बाहर स्थित होते हैं।

(i) फ्लॉपी डिस्क (Floppy Disk)- 

  • यह प्लास्टिक के वर्गाकार आवरण के अन्दर स्थित प्लास्टिक का एक वृत्ताकार डिस्क होता है जिसमें चुम्बकीय पदार्थ का लेप लगा रहता है। वर्तमान में 3% इंच लम्बी फ्लॉपी का इस्तेमाल होता है। 
  • फ्लॉपी की भंडारण क्षमता सामान्यत: 1.44MB से 2.88MB होती है।

(ii) हार्ड डिस्क (Hard Disk)- 

  • एल्युमिनियम के बने इस डिस्क पर चुम्बकीय पदार्थ का लेप लगा रहता है। 
  • इसकी भंडारण क्षमता बहुत अधिक होती है। कम्प्यूटर में लगे हुए हार्ड डिस्क को 'C' ड्राइव का नाम दिया जाता है। 
  • कम्प्यूटर की मूल कार्यपद्धति तथा प्रोग्राम से संबंधित फाइलें इसी ड्राइव में सामान्यत: रखी जाती हैं। 
  • यहाँ आवश्यक प्रोग्राम और डाटा स्टोर किया जाता है। 
  • इनकी क्षमता RAM से कहीं ज्यादा होती है और ये ढेरों जानकारी संग्रह कर रखने में सक्षम होती है। 
  • ये RAM की तरह क्षणभंगुर नहीं होते तथा विद्युत संचार बंद होने के बाद भी इन पर रक्षित की गयी जानकारी बनी रहती है। 
  • इन पर रक्षित की गयी जानकारी अमिट होती है, वे तभी मिटती हैं जब उपयोगकर्ता खुद उन्हें मिटाना चाहे। यह कम्प्यूटर में स्थायी रूप से बने रह इसीलिए दस्तावेज आदान-प्रदान के लिए सामान्यतया इन्हें एक कम्प्यूटर से  निकाल कर दूसरे कम्प्यूटर में नहीं लगाया जाता है


(ii) सी.डी. रॉम (Compact Disk Read Only Memory)- 

  • यह प्लास्टिक का बना वृत्ताकार डिस्क होता है। 
  • इसके ऊपर लेपित पदार्थ से प्रकाश की किरणें परावर्तित होती हैं। 
  • डिस्क पर लिखे डाटा व सूचना को पढ़ने के लिए लेजर बीम का इस्तेमाल किया जाता है। सीडी रॉम ड्राइव की गति को एक संख्या और X से निरूपित किया जाता है जैसे 4x, 8X, 16x, 32X.. आदि। 
  • आमतौर पर सीडी रॉम को भंडारण क्षमता 700 मेगाबाईट होती है।
  • सीडी पर लिखने के लिए सीडी राइटर का प्रयोग किया जाता है। 
  • सीडी पर लिखने के लिए भी उच्च तीव्रता वाले लेजर बीम का प्रयोग किया जाता है।
  • हार्ड डिस्क के विपरीत कॉम्पेक्ट डिस्क आसानी से निकाले जाने लायक होते हैं एवं आसानी से एक जगह से दूसरी जगह लाये-ले जाए जा सकते हैं जिससे दस्तावेजों का आदान-प्रदान आसानी से किया जाता है। 
  • CD का प्रयोग सामान्यतयाः डाटा आदान-प्रदान करने के लिए किया जाता है। परन्तु आजकल CD का स्थान Portable Drive या Pen Drives ने ले लिया है।
  • Send to या डाटा को कॉपी करके CD drive में डाटा को पेस्ट किया जाता है। इसके बाद Data कॉपी होने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। यह प्रक्रिया तब तक चलती है जब तक पूरा डाटा स्थानान्तरित नहीं हो जाता।

(iv) सी.डी.आर (CD-Recordable)- 

  • इसे WORM (Write once Read Many) डिस्क कहा जाता है जिस पर केवल एक बार लिखा जा सकता है, जबकि इसे बार-बार पढ़ा जा सकता है।

(v) सी.डी. आर/डब्ल्यू (CD-Reaawritey- 

  • इस प्रकार के सीडी पर बार बार लिखा जा सकता है अर्थात् एक बार लिखे जाने के बाद उस पर दूसरी डाटा व सूचना को पहले डाटा की जगह लिखा और पढ़ा जा सकता है।

(vi) डीवीडी (DVD-Digital Video Disk)- 

  • यह सीडी रॉम की तरह होता है परन्तु इसकी भंडारण क्षमता बहुत अधिक होती है। 
  • इसमें ध्वनि के लिए डॉल्बी डिजिटल या डिजिटल थियेटर सिस्टम का प्रयोग किया जाता है। 
  • इसमें एकल लेयर डिस्क की क्षमता 4.7 GB तथा दो लेयर डिस्क की क्षमता 8.5 GB होती है। अच्छी गुणवत्ता की पिक्चर्स एवं Images के ज्यादा स्थान घेरने के कारण DVD का उपयोग किया जाता है।

(vi) पेन ड्राइव- 

  • यह पेन के आकार की इलेक्ट्रॉनिक मेमोरी है जिसे यूएसबी पोर्ट (USB Port-Universal Serial Bus Port) में लगाकर डाटा को संग्रहित, परिवर्तित या पढ़ा जा सकता है। इसे फ्लैश ड्राइव (Flash Drive) भी कहा जाता है।