कम्प्यूटर ऑडियो (Computer Audio)

कम्प्यूटर ऑडियो (Computer Audio)

कम्प्यूटर ऑडियो, कम्प्यूटर के साथ, ऑडियो या साउंड के बनाने, रिकॉर्ड और प्लेबैक करने का कार्य करता है। ऑडियो मल्टीमीडिया का एक अन्य आवश्यक तत्व है, क्योंकि कई स्थितियों में, साउंड बहुत हद तक हमारी जानकारी को मजबूत बना सकती है जो किसी अन्य ढंग से प्रस्तुत की गई है और कुछ स्थितियों में, साउंड इच्छित जानकारी उपलब्ध करवाने का एकमात्र साधन है। उदाहरण के लिए, छोटे बच्चों की शिक्षा के लिए दी गई मल्टीमीडिया एप्लिकेशन में (हमारे पहले वाले उदाहरण में), मौखिक रूप से दिखाई जाने वाली चीज का विवरण डाला जा सकता है और खरगोश के फुदकने और चलने में अंतर के समय जिस चीज पर ध्यान देना है उसकी ओर इशारा किया जा सकता है।उसी तरह, एक एनिमेशन क्लिप में घोड़ा हिनहिनाते दिखाया गया है और हिनहिनाने का स्वर प्रभावी ढंग से घोड़े की आवाज को समझा सकता है। घोड़े के हिनहिनाने की, शेर के दहाड़ने की या पंछी की चहचहाहट केवल टेक्स्ट या ग्राफिक द्वारा शुद्ध ढंग से देना असंभव है। 

1. एनालॉग और डिजिटल ऑडियो- 

ऑडियो जानकारी प्राकृतिक माध्यम से साउंड तरंगों के रूप में चलती है जो स्वरूप में एनालॉग है। साउंड तरंगों को एनालॉग से डिजिटल रूप में परिवर्तित करना अनिवार्य है जिससे कम्प्यूटर ऑडियो जानकारी समझ सके। ट्रांस्ड्यूसर एक ऐसा उपकरण है जो सिग्नलों को एक से दूसरे रूप में परिवर्तित करता है। उदाहरण- माइक्रोफोन उस ट्रांस्ड्यूसर का उदाहरण है जो साउंड तरंगो को इलैक्ट्रिकल सिग्नलों में परिवर्तित करते हैं। लाउडस्पीकर वह ट्रांस्ड्यूसर है जो इलैक्ट्रिक सिग्नलों को साउंड तरंगों में परिवर्तित करते हैं। इन्फॉर्मेशन एनालॉग या डिजिटल सिग्नलों के रूप में दिखाई जा सकती है। एनालॉग सिग्नल जोनल फ्लक्चुएशनों की निरंतर टोन दर्शाते हैं, जबकि डिजिटल सिग्नल अंकों द्वारा प्रदर्शित डिस्क्रीट वेल्यू से बने होते हैं। एनालॉग व डिजिटल सिग्नलों के बीच परिवर्तन A/D (एनालॉग से डिजिटल) परिवर्तन और D/A (डिजिटल से एनालॉग) परिवर्तन द्वारा और D/A परिवर्तन एनालॉग इनपुट (जैसे वोलटेज) को न्यूमेरिक रिप्रेजेंटेशन की श्रृंखला में डिजिटाइजेशन द्वारा परिवर्तित किए जाते हैं। D/A परिवर्तन इसकी उल्टी प्रक्रिया है जो डिस्क्रीट अंकों को निरन्तर एनालॉग सिग्नलों में परिवर्तित करती है। 

2. ओडियो के लिए हार्डवेयर यंत्र- 

कम्प्यूटर ऑडियो में सामान्यत: निम्न हार्डवेयर डिवाइसें होती हैं-

  1. साउंडबोर्ड (या साउंड कार्ड) जिसमें AID और D/A कन्वर्टर होते हैं।
  2. किसी प्रकार का इनपुट यंत्र (जैसे माइक्रोफोन) जो संगीत या मनुष्य की आवाज या कम्प्यूटर पर कोई अन्य साउंड रिकॉर्ड करने के लिए ऑडियो इनपुट के रूप में प्रयोग होता है। साउंडबोर्ड का A/D कन्वर्टर किसी भी इनपुट साउंड की डिजिटाइजिंग का कार्य करता है। 
  3. किसी प्रकार को आउटपुट डिवाइस (जैसे स्पीक राय पब्लिवे हैडफोन) जो रिकॉर्ड किए साउंड को सुनने के लिए ऑडियो आउटपुट के काम आता है। साउंडबोर्ड का D/A कन्वर्टर किसी भी आउटपुट साउंड को डिजिटल से एनालॉग रूप में परिवर्तित करने के काम आता है। 
  4. सिंथेसाइज किया साउंड भी कम्प्यूटर पर कीबोर्ड (इंटरैक्टिव डिवाइस जैसे) और साउंड सीक्वेंसर सॉफ्टवेयर के प्रयोग से उत्पन्न किया जा सकता है। 
  5. ऑडियो मिक्सरों का प्रयोग साउंड के कई चैनलों को सिंक्रोनाइजेशन प्वॉइंट जैसे नियंत्रणों से मिलाने के काम आता है।

3. ऑडियो के लिए आवश्यक सॉफ्टवेयर

ऑडियो सुविधा वाले मल्टीमीडिया कम्प्यूटर सिस्टम में निम्न सॉफ्टवेयर सुविधाएँ वांछनीय हैं-

1. ऑडियो क्लिप- 

यह ऑडियो क्लिप की लाइब्रेरी है (जिसमें पहले से बने साउंड इफैक्ट, संगीत और व्याख्यान हैं) जिसमें से हम सीधे चयन कर एक ऑडियो क्लिप इम्पोर्ट कर सकते हैं और उसे मल्टी मीडिया एप्लिकेशन में प्रयोग करते हैं। इससे बहुत समय और मेहनत बचती है जो अन्यथा ऐसे ऑडियो क्लिप ढूँढने में व्यर्थ जाती है। यह वहाँ भी सहायक है जहाँ साउंड सीक्वेंस बनाने की सुविधा नहीं है। ऑडियो क्लिप लाइब्रेरी प्राय: नए ऑडियो क्लिप बनाने या लाइब्रेरी से मौजूदा क्लिप डिलीट करने में सहायता करती है। 

2. ऑडियो फाइल इम्पोटिंग- 

ऑडियो वाली मल्टीमीडिया एप्लिकेशन बनाने का कार्य और भी सरल हो सकता है यदि एप्लिकेशन सॉफ्टवेयर किसी स्टैण्डर्ड फॉरमैट में ऑडियो फाइलें इम्पोर्ट कर सकता है। ऑडियो फाइल जो सॉफ्टवेयर इम्पोर्ट कर सकती है इसे सुविधाजनक बनाती है। ऐसे सॉफ्टवेयर द्वारा समर्थित सामान्य ऑडियो फाइल फॉरमैट हैं, WAV (विण्डोस फाइल), .MID (MIDI फाइल),.VOC, और .INS 

3. उच्च कोटि साउंड के लिए सॉफ्टवेयर समर्थन -

यदि एक मल्टीमीडिया एप्लिकेशन बहुत उच्च गुणवत्ता के ऑडियो का प्रयोग दक्षतापूर्वक साउंड पुनः उत्पन्न करने के लिए प्रयोग करती है, तो केवल आवश्यक हार्डवेयर होना काफी नहीं है बल्कि हाई क्वालिटी ऑडियो की रिकॉर्डिंग और प्लेबैक समर्थन करने वाला सॉफ्टवेयर होना भी अनिवार्य है।

4. रिकॉर्डिंग व प्लेबैक क्षमता- 

यह यूजरों को ऑडियो श्रृंखला की रिकॉर्डिंग और प्लेबैक के नियंत्रण के लिए सक्षम बनाता है। उदाहरण के लिए, यह साउंड श्रृंखला को 'पास' और 'रीप्ले' करने की सुविधा देता है। 

5. टेक्स्ट से स्वीच में परिवर्तन- 

यह लिखे हुए टेक्स्ट को संबंधित साउंड में परिवर्तित करता है। 

6. स्पीच से टेक्स्ट में परिवर्तन- 

यह स्पीच को संबंधित टेक्स्ट में परिवर्तित करता है।

7. वॉयस रेकग्निशन सॉफ्टवेयर-

यह दी गई आवाज के स्पीकर को डेटाबेस में स्टोर की गई आवाजों से मिलाकर, हर आवाज के स्पीकर के साथ जाँचते पहचानने की चेष्टा करता है।

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